खदिया नगला भरखनी budhpurnima San 2021

🌹 आप सबको नमो. बौद्ध🌹
बुद्ध ने ज्ञान के सार को कुल 55 बिंदुओं में समेट दिया।
चार – आर्य सत्य
पाँच – पंचशील
आठ – अष्टांगिक मार्ग और
अड़तीस – महामंगलसुत

बुद्ध के चार आर्य सत्य

1. दुनियाँ में दु:ख है।
2. दु:ख का कारण है।
3. दु:ख का निवारण है। और
4. दु:ख के निवारण का उपाय है।
**********

पंचशील

1. झूठ न बोलना
2. अहिंसा
3. चोरी नहीं करना
4. व्यभिचार नहीं करना और
5. नशापान/मद्यपान नहीं करना
********
अष्टांगिक मार्ग

1. सम्यक दृष्टि (दृष्टिकोण) /Right view
2. सम्यक संकल्प / Right intention
3. सम्यक वाणी / Right speech
4. सम्यक कर्मांत/ Right action
5. सम्यक आजीविका/ Right livelihood (profession)
6. सम्यक व्यायाम / Right exersie (physical activity)
7. सम्यक स्मृति / Right mindfulness
8. सम्यक समाधि / Right meditation (Vpasana Meditation)

***********
तथागत बुद्ध ने 38 प्रकार के मंगल कर्म बताये है जो महामंगलसुत के नाम से भी जाना जाता है, निम्न प्रकार है

2. बुद्धिमानों की संगति करना।
3. शीलवानो की संगति करना।
4. अनुकूल स्थानों में निवास करना।
5. कुशल कर्मों का संचय करना।
6. कुशल कर्मों में लग जाना।
7. अधिकतम ज्ञान का संचय करना।
8. तकनीकी विद्या अर्थात शिल्प सीखना।
9. व्यवहार कुशल एवं विनम्र होना।
10. विवेकवान होना।
11. सुंदर वक्ता होना।
12. माता पिता की सेवा करना।
13. पुत्र-पुत्री-स्त्री का पालन पोषण करना।
14. अकुशल कर्मों को ना करना।
15. बिना किसी अपेक्षाके दान देना।
16. धम्म का आचरण करना।
17. सगे सम्बंधियों का आदर सत्कार करना।
18. कल्याणकारी कार्य करना।
19. मन, शरीर तथा वचन से परपीड़क कार्य ना करना।
20. नशीली पदार्थों का सेवन ना करना।
21. धम्म के कार्यों में तत्पर रहना।
22. गौरवशाली व्यक्तित्व बनाए रखना।
23. विनम्रता बनाए रखना।
24. पूर्ण रूप से संतुष्ट होना अर्थात तृप्त होना।
25. कृतज्ञता कायम रखना।
26. समय समय पर धम्म चर्चा करना ।
27. क्षमाशील होना।
28. आज्ञाकारी होना।
29. भिक्षुओ, शीलवान लोगों का दर्शन करना।
30. मन को एकाग्र करना।
31. मन को निर्मल करना।
32. सतत जागरूकता बनाए रखना ।
33. पाँच शीलों का पालन करना।
34. चार आर्य सत्यों का दर्शन करना ।
35. आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलना।
36. निर्वाण का साक्षात्कार करना।
37. लोक धम्म लाभ हानि, यश अपयश, सुख-दुख,जय-पराजय से विचलित ना होना।
38. शोक रहित, निर्मल एवं निर्भय होना।

अगर कोई अपने दैनिक जीवन में इन 38 मंगल कर्मों का पालन करने लग जाये, तो उसके जीवन से सारे दुःख एवं परेशानियां हमेशा के लिए दूर हो जायेंगी।।।

अध्यात्म के क्षेत्र में गहरा उतरने वालों को त्रिपिटक का अध्ययन करना चाहिए

किंतु, गृहस्थ जीवन सफल और सम्मानित तरीके से जीने और निर्वाण प्राप्त करने के लिए यहाँ दी गई 55 बातें हीं काफी (सफिसियेंट) है।

तो आईये। बुद्ध के बताये मार्ग पर चलकर जीवन यापन करें और धार्मिक आडंबरों और पाखंड से दूर रहें।

बुद्धं शरणम गच्छामि!
धम्मं शरणम गच्छामि!
संघम् शरणम गच्छामि!

नमो बुद्धाय….जय सम्राट अशोक

Rahul Singh Bauddha द्वारा प्रकाशित

नाम शास्त्री शाक्य राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा ग्राम व पोस्ट खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई थाना पाली तहसील सवाजपुर उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं

2 विचार “खदिया नगला भरखनी budhpurnima San 2021&rdquo पर;

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

Create your website with WordPress.com
प्रारंभ करें
%d bloggers like this: