Brahman kaun hai

🚫ब्राह्मण कौन? 🚫

ब्राह्मण दो शब्दों से मिल कर बना है वाराह +मण =वाराहमण

वाराह का अर्थ है सुअर और मण का अर्थ गुह या गंदगी।

🐖इस प्रकार से ब्राह्मण का अर्थ है सुअर का गुह🐖

🐽ब्राह्मणों में ऊंच नीच जातियों का वर्गीकरण🐽

जिसके दो ✌️ या दो से ज्यादा बाप होते हैं उसे ही ब्राह्मण कहते हैं।

👉 जिसके दो बाप होते हैं उसे ही दूबे कहते हैं।

👉 जिसके तीन बाप होते हैं उसे ही तिवारी कहते हैं।

👉 जिसके चार बाप होते हैं उसे ही चौबे या चतुर्वेदी कहते हैं।

👉 जिसके पांच बाप होते हैं उसे ही पांडे या पाठक कहते हैं।

👉 जिसके छःबाप होते हैं उसे ही झा कहते हैं।

👉 जिसके सात बाप होते हैं उसे ही शुक्ला( शर्मा) कहते हैं।

👉 जिसके आठ बाप होते हैं उसे ही मिश्रा कहते हैं।

इस प्रकार से ब्राह्मण लोग चरित्रहीन और दुष्ट प्रवृत्ति के होते हैं इसलिए ही मध्यएशिया से भगाये गये थे

भारत में लगभग 1500 ईसा पूर्व ही आर्य ब्राह्मण भीख मांगने और चोरी करने के उद्देश्य से आये थे।

भारत के भोले भाले मूलनिवासियों को ऊंच नीच भेदभावपूर्ण वर्ण व्यवस्था में बांट कर मूर्ख बनाया और राजाओं की चमचागीरी करके राजाओं का विश्वासघात करके जनता पर शासन करने लगे।

👉 विश्व गुरु तथागत गौतमबुद्ध ने 563 ईसा पूर्व ही ब्राह्मणों की व्यवस्था का बिरोध किया था और सम्राट अशोक ने ब्राह्मणों की व्यवस्था को खत्म करके बुद्धमय भारत का निर्माण किया था और पूरी दुनिया को बुद्ध का मार्ग दिया था जिसके कारण आज विश्व के 125 देशों में बुद्ध धम्म है। और 56देशो का राष्ट्र धर्म ही बुद्ध धम्म है ।

👉 बोधिसत्व, सिंबल आफ नालेज, विश्व रत्न 💎 भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने तथागत गौतमबुद्ध के धम्म को अपनाया और पूरे भारत को बुद्धमय भारत बनाने का संकल्प लिया था।

आज जरूरत है कि भारत के मूलनिवासी (OBC, SC, ST) अपने दिमाग का प्रयोग करें और तथागत गौतमबुद्ध के विचारों को अपना कर चलने के लिए बुद्ध के धम्म को अपनायें।

ज्यादा से ज्यादा शेयर करो।🦊 ब्राह्मणी धर्म का भंडाफोड़ 🦊

👉 वेद बकवास 😷है।

👉 पुराण उपन्यास 🤒है।

👉 महाभारत या भगवतगीता गप्प 😂है

👉 रामायण नाटक 🎩 है।

👉 शास्त्र बड़ो को सुलाने के लिए लोरी।

👉 मनुस्मृति मानव बम या आतंकवाद।

😎ब्राह्मण धर्म जिसे अब हिंदू धर्म कहते हैं वास्तव में कोई मानव धर्म नहीं है 😎

धर्म किसी न किसी महापुरुष की विचारधारा होती है जो कि मनुष्य को आपस में जोड़ने के लिए होता है।

एकमात्र ब्राह्मण (हिंदू) धर्म ऐसा है जो कि इंसानों को तोड़ने के लिए बनाया गया है। और इस प्रकार से इंसानों को बिभाजित किया गया है कि कभी भी एक न हो सके।

🐷ब्राह्मणों ने वेदों के माध्यम से चार वर्ण व्यवस्था में बांटा और फिर मनुस्मृति के माध्यम से हजारों ऊंच नीच भेदभाव की जातियों में बांट दिया उसके बाद गोत्र बनाया 😂

ब्राह्मण धर्म को मानने वाले कभी भी एक न हो सके ब्राह्मणों ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है 😂

👉 राम, कृष्ण, दुर्गा, काली, बंदर हनुमान, हाथी 🐘 के सिर वाला गणेश 🤣 आदि 33करोड़ फर्जी भगवानों और देवी देवताओं को बनाया जिससे लोगों के दिमाग में हमेशा के लिए डर 😱 बनाया रखा जाये।

👉 पूजा पाठ हवन पाखंड और व्रत त्योहार बनाये गये जिससे ब्राह्मणों का आजीवन मुफ्त मान सम्मान से खाने और जीने का रास्ता बना रहे 😂

💓💓💓💓💓💓💓

👉 563 ईसा पूर्व ही पैदा हुए तथागत गौतमबुद्ध ने ब्राह्मणी व्यवस्था का बिरोध किया था और ब्राह्मणों द्वारा ऊंच नीच भेदभाव और हत्या बलात्कार के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन किया था।

👉 प्रियदर्शी सम्राट अशोक ने तथागत गौतमबुद्ध के विचारों को अपना कर पूरी दुनिया में बुद्ध के कल्याणकारी विचारों का प्रचार प्रसार किया जिसके कारण आज विश्व के 125 देशों में बुद्ध धम्म है और लगभग सभी विकसित देश है।

👉 अंतिम मौर्य सम्राट बृहदत मौर्य की ब्राह्मण सेनापति पुष्य मित्र सुंग ने धोखे से हत्या करके ब्राह्मण धर्म फैलाया और मनुस्मृति लागू करके देश में ब्राह्मणों का आतंक फैलाया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद का विरोध संत शिरोमणि रविदास ने किया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद महान संत कबीरदास ने किया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद का विरोध ज्योतिबाराव फुले ने किया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद का विरोध पेरियार रामास्वामी नायकर ने किया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद का विरोध गुरू नानक देव ने किया।

👉 ब्राह्मणों के आतंकवाद का खुला बिरोध और ब्राह्मण धर्म का अंत करने वाले सिंबल आफ नालेज बोधिसत्व भारत रत्न 💎 भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने ब्राह्मण धर्म के रीढ़ की हड्डी तोड़ दिया जिसके कारण अब ब्राह्मणों के आतंक का अंत निश्चित है और ब्राह्मणों के बनाये फर्जी भगवानों और देवी देवताओं और फर्जी वेद, पुराण, शास्त्र, भगवतगीता आदि सब को लोगों ने जलाने शूरू कर दिया है कचरे के डिब्बे में डाल रहे हैं।

💎ऊंच नीच भेदभाव की जातियाँ और अंधविश्वास और पाखंड से बाहर निकल कर बैज्ञानिक मार्ग पर चलें ।

तथागत गौतमबुद्ध और सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ आंबेडकर के विचारों को अपना कर चलें देश को बर्बाद होने से बचाने के लिए सभी अपने सर नेम बौद्ध लगायें और अपना धर्म बुद्ध धम्म लिखे।

🌺 प्रधान अंबेडकर बौद्ध 🌺

Contact no 8955523555

ज्यादा से ज्यादा शेयर करो।🦋🦋गायत्री मंत्र की अश्लीलता 🦋🦋

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आप सभी ‘गायत्री-मंत्र’ के बारे में अवश्य ही परिचित हैं , लेकिन क्या आपने इस मंत्र के अर्थ पर गौर किया ? शायद नहीं ! जिस गायत्री मंत्र और उसके भावार्थ को हम बचपन से सुनते और पढ़ते आये हैं , वह भावार्थ इसके मूल शब्दों से बिल्कुल अलग है | वास्तव में यह मंत्र ‘नव-योनि’ तांत्रिक क्रियाओं में बोले जाने वाले मन्त्रों में से एक है | इस मंत्र के मूल शब्दों पर गौर किया जाये तो यह मंत्र अत्यंत ही अश्लील व भद्दा है ! इसके प्रत्येक शब्द पर गहराई से गौर किया जाये तो यह किसी भी दृष्टि से अध्यात्मिक अर्थ नहीं देता |

👉 मंत्र – ॐ भू: भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् |

👉 प्रत्येक शब्द की अलग-अलग व्याख्या :-

ॐ भूर्भुवः (भुः भुवः), स्वः तत्सवितुर्वरेण्य (तत् सवित उर वरणयं),

भर्गो=भार्गव/भृगु,देवस्य(देव स्य), धीमहि धियो योनः प्र चोद्यात |

👉 ॐ =प्रणव ।

👉 भूर = भूमि पर ।

👉 भुवः = आसीन / निरापद हो जाना /लेट जाना [(भूर्भुवः=भुमि पर)]।

👉 स्व= अपने आपको ।

👉 तत्= उस ।

👉 सवित= अग्नि के समान तेज, कान्तियुक्त की ।

👉 उर=भुजाओं में ।

👉 वरण्यं = वरण करना, एक दूसरे के/ एकाकार हो जाना ।

👉 भर्गोः देवस्य=भार्गवर्षि/विप्र(ब्राहमण) के लिये ।

👉 धीमहि= ध्यानस्थ होना /उसके साथ एक रूप होना | [

👉 (धी =ध्यान करना),

👉 (महि=धरा,धरती,धरणी,धारिणी के/से सम्बद्ध होना)

👉 धियो =उनके प्रति/मन ही मन मे ध्यान कर/मुग्ध हो जाना/ भावावेश क्षमता को तीव्रता से प्रेरित करना ।

👉 योनः= योनि/ स्त्री जननांग ।

👉 प्र= [उपसर्ग] दूसरों के / सन्मुख होना/ आगे करना या होना /समर्पित / समर्पण करना ।

👉 चोदयात्= मँथन / मेथुन / सहवास / समागम / सन्सर्ग के हेतु ।

👉 सरलार्थ:- हे देवी (गायत्री) , भू पर आसीन होते (लेटते) हुए , उस अग्निमय और कान्तियुक्त सवितदेव के समान तेज भृगु (ब्राहमण) की भुजाओं में एकाकार होकर मन ही मन में उन्ही के प्रति भावमय होकर उनको धारण कर लो और पूर्ण क्षमता से अपनी योनि को संभोग (मैथुन) हेतु उन्हें समर्पित कर दो |

👉 वैदिक धर्म का मूल आधार सुरा – सुंदरी , सम्भोग, मांसाहार और युद्ध है। गायत्री मन्त्र सम्भोग मन्त्र है। गायत्री मंत्र को नव योनि मंत्र भी कहते है । जिस अश्लील मंत्र को आज भी ब्राह्मणवादी लोग शुभ बताते हैं । ऐसे ही ब्राह्मणवादी अंधविश्वासों से देश का बंटाधार होता जा रहा है । हम अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति के नाम पर अश्लीलता परोस रहे हैं । जबकि यह भारतीय संस्कृति नही है । यह विदेशी आर्यों की ब्राह्मणवादी अश्लील संस्कृति है , जिसको कुछ ब्राह्मणवादी अश्लील लोग इस संस्कृति को शुभ बताकर देश में अश्लीलता फैला रहे हैं ।

👉 जोकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद – 19(2) के अधीन गैर क़ानूनी है ।

👉 सिर्फ़ ब्राह्मणों के कहे सुनाए पर मत मानो अपने दिमाग भी लगाओ,

👉 संस्कृत भाषा के ब्याकरण के अनुसार शब्दों का अर्थ यही है और ब्रह्मा द्वारा अपनी ही बेटियों के साथ बलात्कार की कहानी इस बात की पुष्टि करती है कि ब्रह्मा द्वारा गायत्री को सेक्स के लिए तैयार करने को ही गायत्री मंत्र कहते हैं।

👉 गुगल में अपलोड किया गया अर्थ किसी भी तरह से शब्दकोश से और संस्कृत के शब्दों के अर्थ से मेल नहीं खाता है।

👉 गुगल में अपलोड किया गया अर्थ सिर्फ गुमराह करने के लिए ही अपलोड किया गया है।

जिसे बुरा लगा हो वो पहले संस्कृत के व्याकरण के अनुसार और हिंदू धर्म के कहानी के अनुसार अर्थ बताये, कुतर्क और गाली गलौज करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

👉 जो लोग सहमत है और देश को जातिवाद, अंधविश्वास और पाखंड से आजाद कराना चाहते हैं ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।मनुस्मृति की छोटी सी जानकारी और कुछ कानून:-

1. मनुस्मृति (100) के अनुसार पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह ब्राह्मणों का है।

2. मनुस्मृति (101) के अनुसार दूसरे लोग ब्राह्मणों की दया के कारण सब पदार्थों का भोग करते हैं।

3. मनुस्मृति (11-11-127) के अनुसार मनु ने ब्राह्मणों को संपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष अधिकार दिया है। वह तीनों वर्णों से बलपूर्वक धन छीन सकता है अर्थात् चोरी कर सकता है।

4. मनुस्मृति (4/165-4/166) के अनुसार जान-बूझकर क्रोध से जो ब्राह्मण को तिनके से भी मारता है, वह 21 जन्मों तक बिल्ली की योनी में पैदा होता है।

5. मनुस्मृति (5/35) के अनुसार जो मांस नहीं खाएगा, वह 21 बार पशु योनी में पैदा होगा।

6. मनुस्मृति (64 श्लोक) के अनुसार ‘अछूत’ जातियों के छूने पर स्नान करना चाहिए।

7. व्यवस्था वादी (मनुस्मृति) धर्म सूत्र (2-3-4) के अनुसार यदि शूद्र किसी वेद को पढ़ते सुन लें तो उनके कान में पिघला हुआ सीसा या लाख डाल देनी चाहिए।

8. मनुस्मृति (8/21-22) के अनुसार ब्राह्मण चाहे अयोग्य हो, उसे न्यायाधीश बनाया जाए वर्ना राज्य मुसीबत में फंस जाएगा। इसका अर्थ है कि भूत पुर्व में भारत के उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री अलतमस कबीर साहब को तो रखना ही नहीं चाहिये था।

9. मनुस्मृति (8/267) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण को दुर्वचन कहेगा तो वह मृत्युदंड का अधिकारी है।

10. मनुस्मृति (8/270) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण पर आक्षेप करे तो उसकी जीभ काटकर दंड दें।

11. मनुस्मृति (5/157) के अनुसार विधवा का विवाह करना घोर पाप है। विष्णुस्मृति में स्त्री को सती होने के लिए उकसाया गया है।

12. मनुस्मृति में दहेज देने के लिए प्रेरित किया गया है।

13. देवल स्मृति में तो किसी को भी बाहर देश जाने की मनाही है।

14. मनुस्मृति में बौद्ध भिक्षु व मुंडे हुए सिर वालों को देखने की मनाही है।

15. मनुस्मृति (3/24/27) के अनुसार वही नारी उत्तम है, जो पुत्र को जन्म दे।

16. (35/5/2/47) के अनुसार पत्नी एक से अधिक पति ग्रहण नहीं कर सकती, लेकिन पति चाहे कितनी भी पत्नियां रखे।

17. (1/10/51/52), बोधयान धर्मसूत्र (2/4/6), शतपथ ब्राह्मण (5/2/3/14) के अनुसार जो स्त्री अपुत्रा है, उसे त्याग देना चाहिए।

18. मनुस्मृति (6/6/4/3) के अनुसार पत्नी आजादी की हकदार नहीं है।

19. मनुस्मृति (शतपथ ब्राह्मण) (9/6) के अनुसार केवल सुंदर पत्नी ही अपने पति का प्रेम पाने की अधिकारी है।

20. बृहदारण्यक उपनिषद् (6/4/7) के अनुसार अगर पत्नी संबंध करने के लिए तैयार न हो तो उसे खुश करने का प्रयास करो। यदि फिर भी न माने तो उसे पीट-पीटकर वश में करो।

21. मैत्रायणी संहिता (3/8/3) के अनुसार नारी अशुभ है। यज्ञ के समय नारी, कुत्ते व शूद्र को नहीं देखना चाहिए अर्थात नारी व शूद्र कुत्ते के समान हैं।

22. मनुस्मृति (1/10/11) के अनुसार नारी तो एक पात्र(बर्तन) के समान है।

23. महाभारत (12/40/1) के अनुसार नारी से बढ़कर अशुभ कुछ भी नहीं है। इनके प्रति मन में कोई ममता नहीं होनी चाहिए।

नोट – यह जानकारी हिन्दू धर्म ग्रंथों से लिया गया है जिसे कोई संदेह हो वह हिन्दू (व्यवस्थावादी धर्म) को पढ़ सकते हैं।

कोई भी डॉक्टर, इंजीनियर, नर्स, आईटी पेशेवर, फार्मासिस्ट, अंतरिक्ष वैज्ञानिक,नभ-थल-जल सैनिक, पायलट, विज्ञान शिक्षक इत्यादि यदि धर्म के बाह्य व अंधविश्वासी रूप को पूजता है तो उसे फिर से स्कूल जाने की ज़रूरत है।

🙏🙏जय भीम 🙏🙏जय संविधान 🙏🙏नमो बुद्धाय🙏🙏‼️राजपूत कौन???‼️

हिन्दू धर्म के वर्ण व्यवस्था में 4 वर्ण है

1-ब्राह्मण(GENRAL)

2-क्षत्रिय(GENRAL)

3-वैश्य(GENRAL)

4-शूद्र(OBC +SC +ST)

👉 राजपूत शब्द कहाँ से पैदा हुआ ???

ब्राह्मण परशुराम ने 21बार मार मार कर क्षत्रियों को खत्म कर दिया था.

क्षत्रियों की विधवाओं को ब्राह्मणों ने अपनी रखैल बनाया और जिसे नियोग कहते थे और विधवा को रांड कहते थे इस प्रकार क्षत्रियों की विधवाओं या रांड द्वारा पैदा हूए पुत्रों को रांडपुत्र कहते थे।

रांडपुत्र शिक्षा के अभाव में दुष्ट स्वाभाव के होते थे और चोरी जबरन छीनना उनका धंधा बन गया था और इस प्रकार से दूसरों के हक छीन कर राजा बन गये।

राजा बनने के बाद से रांडपुत्र को राजपुत्र कहने लगे और राजपुत्र ही आज राजपूत कहलाते हैं।

👉 तथागत गौतमबुद्ध और सिंबल आफ नालेज बाबा साहब डॉ आंबेडकर के विचारों को अपना कर चलें जातियाँ और अंधविश्वास और पाखंड से बाहर निकलो ।

👉 इसीलिए राजपूत होना गर्व नहीं बल्कि शर्म की बात है।

ज्यादा से ज्यादा शेयर करो 🔥 🔥 🔥सर्वप्रथम #हिन्दू शब्द का प्रयोग #भारत में कब और क्यों हुआ…वैसे तो 1030 ईस्वी में महमूद गजनवी के साथ आये फारसी इतिहासकार अल्वेसुनि ने पहली बार हिन्दू शब्द का लिखित तौर पर प्रयोग किया ।हिन्दू शब्द फारसी भाषा के गया हूल सौगात शब्दकोष से आया है। जिसका शाब्दिक अर्थ है काला, चोर, बदमाश, काफिर, असभ्य गुलाम है। इस बात का जिक्र एक और ग्रन्थ में मिलता है जिसका लेखक गुजरात का ब्राहम्ण दयानंद सरस्वती था। इस ग्रन्थ का नाम है “सत्यार्थ प्रकाश” । इस ग्रन्थ मे दयानंद ने लिखा है कि हिन्दू शब्द संस्कृत का शब्द नही है ये मुसलमान शासकों द्वारा हमें दी हुई गाली है। इसलिए हमें अपने आप को हिन्दू नही कहना चाहिए। हम आर्य है और हमारा धर्म भी आर्य है , हमे अपने आप को आर्य ही कहना चाहिए। स्वामी दयानंद जो कि एक कट्टर ब्राहम्ण थे उन्होंने हिन्दू शब्द को इस्तेमाल न करने की अपनी लिखे हुए ग्रन्थ में कही । जिसे यकीन न हो वो सत्यार्थ प्रकाश उठाकर पढ़ लें ।दूसरा सबसे बड़ा उदाहरण इतिहास के पन्नो में मिलता है।जब भारत में जजिया कर लगाया गया तो ब्राह्मणों ने देने से मना कर दिया और कहा कि हम हिन्दू नही है हम भी तुम्हारी तरह बाहर से आये हुए आर्य शासक है। फर्क इतना है कि हम तुमसे पहले भारत में आये थे।तो मुगल शासकों ने भारत के ब्राह्मणों को जजिया कर से मुक्त कर दिया था। ब्राह्मणों ने 1920 में पहली बार कहा है कि गर्व से कहो हम सब हिन्दू है। उसका भी बहुत बड़ा कारण है जिसे यह का मूलनिवासी दिमाग पर जोर डालकर समझे । इससे पहले ब्राहम्ण अपने आप को हिन्दू भी नही मानता था।1922 पंडित मदन मोहन मालवीय ने ब्राहमणों को शासक बनाने के लिए हिन्दू महासभा का गठन किया। जो बाद में आरएसएस में तब्दील हुआ क्योंकि 1917 ब्रिटेन मे वयश्क मताधिकार लागू किया तो भारत के ब्राह्मणों के दिमाग मे खुजली होने लगी कि यदि अंग्रेज लोग अपने देश में वोट द्वारा सरकार बनाने का कानून लागू किया तो देर सबेर भारत में भी लागू कर सकते हैं । जो बाद में सच भी हुआ यदि भारत में वयश्क मताधिकार लागू हो गया (जो कि ब्रिटेन में लागू हो चुका था ) तो 3.5%ब्राह्मण ग्राम पंचायत का सदस्य भी नहीं बन सकता। इसलिये 1917 से 1922 तक 5 वषों तक पूरे भारत में मन्थन करते रहे , अन्ततः सभी ब्राहमणों ने SC, ST, OBC को हिन्दू बनाकर ( जो बेसिकली भारत के मूलनिवासी है ) उनका लीडर बनकर ब्राह्मणों को शासक बनाने के लिए 1922 मे हिन्दू महासभा का गठन किया। जिसके कारण 1950 से आजतक भारत का शासक ब्राह्मण बनता चला आ रहा है। इसलिए जबतक SC,ST,OBC. अपने को हिंदू मानता रहेगा तबतक वह भारत में शासक नहीं बन सकता। यदि यकीन न हो तो आज और अभी प्रशासनिक व राजनीतिक आंकड़े उठा कर देखिए और समझियेआज भारत के तिरंगे का चक्र, भारत का राष्ट्रीय चिन्ह, भारत की मुद्रा चिन्ह अशोक की लाट सब बौद्ध धम्म से सम्बन्धित है, और जिन देशों ने बौद्ध धम्म को माना वह देश विकसित देश हो गया , जबकि भारत में जन्मा धम्म ब्राह्मणों के मानसिक गुलामी के मकड़जाल में फसते गए यहाँ के मूलनिवासियो की वजह से दम तोड़ रहा है ।जबकि हिन्दू वाला भारत देश उन देशों से काफी पीछे है। बौद्ध धम्म चीन, जापान इन्डोनेशिया, जकार्ता, श्री लंका, तिब्बत, वर्मा, तमाम देशों मे मानते है और यह बौद्ध धम्म विश्व का सर्वश्रेष्ठ धम्म माना जाता है जो सबको समानता और मानवता की बात करता है ।इसलिए भारत के समस्त SC,ST,OBC हिन्दू होने के भरम को छोड़े, बौद्ध धम्म अपनाये और विदेशी ब्राह्मणों द्वारा 6743 जातियों मे बाटे गये एस.सी./एस.टी./ओबीसी सब मूलनिवासी बन एकजुट हो जायें तो बहुत जल्द हम भी भारत के शासक बन सकते है ।

#वामन #मेश्राम

सादर नमो बुद्धाय जय भीम जय मूलनिवासी जय संविधान जय विज्ञान जय भारत‼️ दिमाग का ढक्कन खोलें ‼️

🔵राम, कृष्ण, दुर्गा, काली, बंदर हनुमान, गणेश, शंकर आदि सभी हत्यारे और आतंकवादी थे 🔵

👉 राम के हाथ में धनुष वाण क्यों?

👉कृष्ण के हाथ में चक्र कयों?

👉 दुर्गा के हाथ में तलवार और गदा क्यों?

👉 काली के हाथ में तलवार क्यों?

👉 शंकर के हाथ में त्रिशूल 🔱 क्यों??

👉 हनुमान के हाथ में गदा क्यों??

🔴 हत्या करने वाला हत्यारा ही होता है भगवान और देवी देवता नहीं ❌🔴

जिनके हाथों में हथियार है वे भगवान और देवी देवता नहीं हो सकते हैं।

क्योंकि हथियार वही रखते हैं जिन्हें किसी से डर लगता है और अपनी रक्षा के लिए और दूसरे कई हत्या करने के लिए ही हथियार रखते हैं।

❤️भगवान और देवी देवता में शक्तियाँ थी तो उन्हें डर किससे था??💓

भगवान को शर्व व्यापी और शर्व शक्तिमान क्यों कहते हैं 😂

💘वास्तव में हिंदू धर्म के भगवान और देवी देवता कुछ भी नहीं है ये भारत के मूलनिवासियों के पूर्वजों के हत्यारे थे💔 जिन्हे ब्राह्मणों ने भगवान और देवी देवता बना कर लोगों को मूर्ख बना कर अपने ही हत्यारे की पूजा करवा रहे हैं। 💘

💓प्रकृति द्वारा पैदा किये गये महापुरुषों जिन्होंने मानव कल्याण के लिए कार्य किया है वास्तव में वही भगवान है। 💓

महापुरुषों ने बिना किसी हथियार के समाज के पीडितों की मदद किया है और देश के लिए अपना सब कुछ कुर्बान किया है।

👉 विश्व गुरु तथागत गौतमबुद्ध के हाथ में कोई हथियार नहीं।

सभी भगवानों और देवी देवताओं को खत्म कर दिया ऊंच नीच भेदभाव की जातियाँ को खत्म कर दिया था

पूरी दुनिया बुद्ध को मानती है ।

👉 संत शिरोमणि रविदास के हाथ में कोई हथियार नहीं।

ब्राह्मणों के बनाये फर्जी भगवानों और देवी देवताओं और जाति व्यवस्था का बिरोध किया ।

👉 महान संत कबीरदास के हाथ में कोइ हथियार नहीं।

ब्राह्मणों द्वारा निर्मित फर्जी भगवानों और देवी देवताओं और पूजा पाठ हवन पाखंड और जाति व्यवस्था का बिरोध किया।

👉 ज्योतिबाराव फुले के हाथ में कोई हथियार नहीं।

ब्राह्मणों द्वारा निर्मित फर्जी भगवानों और देवी देवताओं और पूजा पाठ हवन पाखंड और जाति व्यवस्था का खुल कर बिरोध किया।

👉 पेरियार रामास्वामी नायकर के हाथ में कोई हथियार नहीं, सभी भगवानों और देवी देवताओं को जूते मारते हुए शहरों में घुमाया था।और जाति व्यवस्था का बिरोध किया था।

👉 पेरियार ललई सिंह यादव बौद्ध ने

ब्राह्मणों का धर्म हिंदू धर्म छोड कर बुद्ध धम्म अपनाया था और ब्राह्मणी वायरस का अंत किया था।

💓सिंबल आफ नालेज बोधिसत्व भारत रत्न 💎 भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने ब्राह्मणी वायरस में आग 🔥 लगा दिया था ब्राह्मणों की व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दिया और बुद्ध धम्म अपना कर भारत में क्रांतिकारी बदलाव किया है ब्राह्मणों के बनाये फर्जी भगवानों और देवी देवताओं को अपनी 22 प्रतिज्ञाओ के माध्यम से हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।

बहुत सच्ची परन्तु कड़वी जानकारी है

अगर समझ में आया है तो शेयर जरूर करें ।

डॉ महेन्द्र सिंह यादव बौद्ध

99997455105 मिनट का समय निकाल कर जरूर पढ़े भगवानो के कारनामे👇👇👇👇

🏼”नास्तिक” होना आसान नही

कोई भी “नासमझ” इंसान “ईश्वर” के अस्तित्व को मानकर फ्री हो जाता है उसके लिए उसे “बुद्धि” की जरुरत नही होती परंतु नास्तिक होने के लिए “दृढ विश्वास और साहस” की जरूरत होती है ऐसी “योग्यता” उन लोगो के पास होती है जिनके पास “प्रखर तर्क बुद्धि” होती है. “अंधश्रद्धा” ऐसा “केमिकल” है जो इंसान को “मूर्ख” बनाने मे काम आता है .

— पेरियार ई.वी. रामास्वामी

@ हिन्दू धर्म का विचित्र इतिहास @

1- मंदोदरी ” मेंढकी ” से पैदा हुई थी !

2- ” श्रंगी ऋषि ” ” हिरनी ” से पैदा हुये थे !

3- ” सीता” ” मटकी” मे से पैदा हुई थी !

4- ” गणेश ” अपनी ” माँ के मैल ” से पैदा हुये थे !

5- ” हनुमान ” के पिता पवन ” कान ” से पैदा हुये थे !

6- हनुमान का पुत्र # मकरध्वज था जो # मछ्ली के मुख से पैदा हुआ था !

7- मनु सूर्य के पुत्र थे उनको छींक आने पर एक लड़का नाक से पैदा हुआ था !

8- राजा दशरत की तीन रानियो के चार पुत्र जो फलो की खीर खाने से पैदा हुये थे

9- सूर्य कर्ण का पिता था। भला सूर्य सन्तान कैसे पैदा कर सकता है वो तो आग का गोला है !

” ब्रह्मा ” ने तो 4 वर्ण यहां वहां से निकले हद है !!

” दलित ” का बनाया हुआ ” चमड़े का ढोल”

# मंदिर में बजाने से मंदिर # अपवित्र नहीं होता!

” दलित ” मंदिर में चल जाय तो मंदिर ” अपवित्र ” हो जाता है।

# उन्हें इस बात सेकोई # मतलब नहीं की # ढोल किस जानवरकी चमड़ी से बना है।

उनके लिए # मरे हुए जानवर की चमड़ी पवित्र है,

पर जिन्दा दलित अपवित्र….!!

” लानत है ऐसे धर्म पर” ….!!!

” बुद्धिजीवी ” प्रकाश डाले !! दिमाग की बत्ती जलाओ अंधविश्वास भगाऔ

यदि ” पूजा-पाठ ” करने से ही ” बुद्धि ” और ” शिक्षा ” आती तो…

” पंडों की औलादें ” ही विश्व में # वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर “# होती..!!

” वहम् ” से बचों अपने बच्चों को ” उच्च शिक्षा ” दिलवाओ..#

क्योंकि,

” शिक्षा ” से ही ” वैज्ञानिक-डॉक्टर-इंजीनियर ” और शासक बनते हैं ..!

# ” पूजा-पाठ ” से नहीं..!

# अतः ” वहम् ” का कोई ईलाज नहीं ..!!

और

” शिक्षा” का कोई # जवाब नहीं..!!

” शिक्षित बनो ” .. ” संगठित रहो ” .. ” संघर्ष करो “

🦀ब्राह्मण धर्म और बलात्कार 🦀

#यह_है_सनातन_धर्म

क्या आप जानते हैं ?

🏻इन्द्र ने – गौतम ऋषि की पत्नी “अहिल्या ” के साथ रेप किया !

🏻चन्द्रमा ने – अर्क अर्पण करती ब्रहस्पति की पत्नी “तारा ” के साथ रेप किया !

🏻अगस्त्य ऋषि ने – सोम की पत्नी “रोहिणी ” के साथ रेप किया !

🏻ब्रहस्पति ऋषि ने – औतथ्य की पत्नी व मरूत की पुत्री “ममता “के साथ रेप किया !

🏻पराशर ऋषि ने – वरुण की पुत्री “काली “के साथ रेप किया !

🏻विश्वामित्र ने – अप्सरा “मोहिनी” के साथ सम्भोग किया !

🏻वरिष्ठ ऋषि ने – “अक्षमाला ” के साथ रेप किया !

🏻ययाति ऋषि ने – “विश्ववाची “के साथ रेप किया !

🏻पांडु ने – “माधुरी “के साथ रेप किया !

🏻राम के पूर्वज राजा दण्ड ने – शुक्राचार्य की पुत्री “अरजा “के साथ रेप किया !

🏻ब्रह्मा ने – अपनी बहिन गायत्री और पुत्री सरस्वती के साथ रेप किया !

ऐसी न जानें कितनी घटनाएँ इनके धर्म ग्रन्थों में भरी पढ़ी हैं इस पोस्ट को करने का मेरा एक ही मकसद है मैं हिन्दू धर्म के ठेकेदारों से पूछना चाहता हूँ ?

🏻इन बलात्कारियों का दहन क्यों नहीँ ?

और –

“रावण महान ” जैसे महा विद्वान शीलवान व्यक्तित्व का जिसने सीता का अपहरण तो किया पर कोई शील भंग नहीँ किया, ऐसे नारी को सम्मान देने वाले “रावण ” का दहन आखिर क्यों ?

🕯जागो जागो 🕯

____💎रत्न विचार 💎

भगवान से *न्याय* मिलता,

तो *न्यायालय* नहीं होते।

सरस्वती से *ज्ञान* मिलता,

तो *विद्यालय* नहीं होते।

दुआओ से *काम* चलता,

तो *औषधालय* नहीं होते।

बिन काम किये *भाग्य* चमकता,

तो *कार्यालय* नहीं होते।

मंदिर धर्म के दलालों की *निजी दुकान* है, जो कि कुछ *विशेष जाती* के लोगो को ही फायदा पहुँचाने के लिए है।

वहाँ वही जाते हैं, जो *दिमाग से गुलाम* होते हैं।

सोच बदलो,

ब्राह्मणवाद मिटाओ।

दिमाग की बत्ती जलाओ।

अंध विस्वास मिटाओ।*मनुस्मृति की छोटी सी जानकारी और कुछ कानून जो इस संविधान से पहले लागू थे, कुछ लोग वर्तमान संविधान को बदलकर नीचे दिए संविधान को फिर से लाना चाहते हैं, जिसे वो हिंदुत्व कह रहे हैं, जो ओबीसी, एससी एसटी के लिए उचित नहीं है।:-*

1. मनुस्मृति (100) के अनुhसार पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह ब्राह्मणों का है।

2. मनुस्मृति (101) के अनुसार दूसरे लोग ब्राह्मणों की दया के कारण सब पदार्थों का भोग करते हैं।

3. मनुस्मृति (11-11-127) के अनुसार मनु ने ब्राह्मणों को संपत्ति प्राप्त करने के लिए विशेष अधिकार दिया है। वह तीनों वर्णों से बलपूर्वक धन छीन सकता है अर्थात् चोरी कर सकता है।

4. मनुस्मृति (4/165-4/166) के अनुसार जान-बूझकर क्रोध से जो ब्राह्मण को तिनके से भी मारता है, वह 21 जन्मों तक बिल्ली की योनी में पैदा होता है।

5. मनुस्मृति (5/35) के अनुसार जो मांस नहीं खाएगा, वह 21 बार पशु योनी में पैदा होगा।

6. मनुस्मृति (64 श्लोक) के अनुसार ‘अछूत’ जातियों के छूने पर स्नान करना चाहिए।

7. व्यवस्थावादी (मनुस्मृति) धर्म सूत्र (2-3-4) के अनुसार यदि शूद्र किसी वेद को पढ़ते सुन लें तो उनके कान में पिघला हुआ सीसा या लाख डाल देनी चाहिए।

8. मनुस्मृति (8/21-22) के अनुसार ब्राह्मण चाहे अयोग्य हो, उसे न्यायाधीश बनाया जाए वर्ना राज्य मुसीबत में फंस जाएगा। इसका अर्थ है कि भूतपूर्व में भारत के उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री अलतमस कबीर साहब को तो रखना ही नहीं चाहिये था।

9. मनुस्मृति (8/267) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण को दुर्वचन कहेगा तो वह मृत्युदंड का अधिकारी है।

10. मनुस्मृति (8/270) के अनुसार यदि कोई ब्राह्मण पर आक्षेप करे तो उसकी जीभ काटकर दंड दें।

11. मनुस्मृति (5/157) के अनुसार विधवा का विवाह करना घोर पाप है। विष्णुस्मृति में स्त्री को सती होने के लिए उकसाया गया है।

12. मनुस्मृति में दहेज देने के लिए प्रेरित किया गया है।

13. देवल स्मृति में तो किसी को भी बाहर देश जाने की मनाही है।

14. मनुस्मृति में बौद्ध भिक्षु व मुंडे हुए सिर वालों को देखने की मनाही है।

15. मनुस्मृति (3/24/27) के अनुसार वही नारी उत्तम है, जो पुत्र को जन्म दे।

16. (35/5/2/47) के अनुसार पत्नी एक से अधिक पति ग्रहण नहीं कर सकती, लेकिन पति चाहे कितनी भी पत्नियां रखे।

17. (1/10/51/52), बोधयान धर्मसूत्र (2/4/6), शतपथ ब्राह्मण (5/2/3/14) के अनुसार जो स्त्री अपुत्रा है, उसे त्याग देना चाहिए।

18. मनुस्मृति (6/6/4/3) के अनुसार पत्नी आजादी की हकदार नहीं है।

19. मनुस्मृति (शतपथ ब्राह्मण) (9/6) के अनुसार केवल सुंदर पत्नी ही अपने पति का प्रेम पाने की अधिकारी है।

20. बृहदारण्यक उपनिषद् (6/4/7) के अनुसार अगर पत्नी संबंध करने के लिए तैयार न हो तो उसे खुश करने का प्रयास करो। यदि फिर भी न माने तो उसे पीट-पीटकर वश में करो।

21. मैत्रायणी संहिता (3/8/3) के अनुसार नारी अशुभ है। यज्ञ के समय नारी, कुत्ते व शूद्र (ओबीसी) को नहीं देखना चाहिए अर्थात नारी व शूद्र कुत्ते के समान हैं।

22. मनुस्मृति (1/10/11) के अनुसार नारी तो एक पात्र (बर्तन) के समान है।

23. महाभारत (12/40/1) के अनुसार नारी से बढ़कर अशुभ कुछ भी नहीं है। इनके प्रति मन में कोई ममता नहीं होनी चाहिए।

*नोट – यह जानकारी हिन्दू (ब्राह्मण) धर्मग्रंथों से लिया गया है जिसे कोई संदेह हो वह हिन्दू (व्यवस्थावादी धर्म) को पढ़ सकते हैं।*

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शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

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Rahul Singh Bauddha द्वारा प्रकाशित

गौतमबुद्ध म्यूजिक प्रोडक्शन खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

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