Rising star music hardoi khadiya Nagla bharkhani

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हमारे यूट्यूब चैनल पर अनेक प्रकार के साॅन्ग व म्यूजिक प्रोडक्शन से सम्बंधित वीडियो अपलोड किये जाते हैं ।। तथा देहाती मनोरंजन जैसे ढोला नौटंकी आदि भी समय समय पर आते रहते हैं ।

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मेरी यूट्यूबर फैमली,शास्त्री राहुल सिंह कुशवाहा

ब्लॉग द्वारा Rahul Kushwaha0
व्यूज

मेरी यूट्यूबर फैमली

आज 30/8/2021 दिन सोमवार

हम क्लोज फ्रेंड्स यूट्यूबरों की मुलाकात अल्हागंज के पास ग्राम रामपुर मे हुई

मै अपने ह्रदय से ऐसी भावना करता हूं कि हमरी दोस्ती इसी तरह सलामत रहे ।

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अरविंद कुशवाहा रामपुर, राज कुशवाहा रामपुर, राज कुशवाहा चम्पतपुर, शास्त्री राहुल सिंह कुशवाहा खदिया नगला भरखनी,

हमलोगों के यूट्यूब चैनल पर आप सभी भाइयों का बहुत बहुत स्वागत् है ।।

हमारी दोस्ती और ये हम लोगों का प्रेम सदैव बना रहे ।

ऐसा आपलोगों से आशीर्वाद चाहता हूँ

राइजिंग स्टार म्यूजिक हरदोई

प्रो-: शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी

किसीभी तरह की म्यूजिक व साॅन्ग बनवाने के लिए सम्पर्क करे

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई उत्तर प्रदेश

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Gautam Buddh music khadiya Nagla pali hardoi

गौतमबुद्ध म्यूजिक प्रोडक्शन खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई उत्तर प्रदेश ।।

संगीत हमरी जिन्दगी का एक अहम हिस्सा है ।। यह हमारा बिजनेस नही बल्कि शौक है ।।

किसी भी तरह की म्यूजिक बनवाने के लिए सम्पर्क करे -:: 9198979617

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

veerangana Phoolan Devi

वीरांगना फूलन देवी

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा

वीरांगना स्व0 फूलन देवी कथा सभी को आवगत कराएं किस तरह से उनके जीवन में उतार चढ़ाव व दुःख आये लेकिन उन्होंने ने अपना जीवन जीना नहीं छोड़ा और आज विश्व में उनकी पहचान बनी है।
आप उस दर्द को महसूस करिए जब एक खास राजपूत समुदाय के कई लोगों ने तकरीबन 15 साल की एक लड़की के साथ बलात्कार किया होगा. इस तरह के दर्द और जलालत को झेलने के बाद आप क्या करते, शायद वही जो फूलन देवी ने किया. उन्होंने लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों को गोलियों से भून डाला. हालांकि फूलन देवी ने इस घटना को कभी स्वीकार नहीं किया.

फूलन देवी का जन्म 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के एक छोटे से गांव गोरहा का पूर्वा में निषाद (मल्लाह) जाति के देवीदीन और मूला देवी के घर हुआ. जब फूलन 11 साल की हुई, आर्थिक तंगी की वजह से उसकी शादी उससे उम्र में कई साल बड़े एक आदमी से करवा दी गई. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि यह शादी एक गाय के बदले कर दी गई. अपने पति के रवैये से तंग आकर फूलन ने पति का घर छोड़ दिया और वापस मां-बाप के पास आकर रहने लगी. मायके आने पर घऱवालों ने भी उनका साथ नहीं दिया. हालात ऐसे बने कि गांव के ठाकुरों की नजर अकेली फूलन को देखकर खराब होने लगी. जब फूलन तकरीबन पंद्रह साल की थी तो ठाकुरों के एक गैंग ने फूलन देवी को जबरन उठा लिया और दो हफ्ते तक बारी-बारी से उसका बलात्कार करते रहे. इस अपमान और पीड़ा से गुजरी फूलन ने इस अपमान का बदला लेने की खातिर समाज से विद्रोह करते हुए बीहड़ की तरफ चली गई. बीहड़ में बागियों से जुड़ने के बाद फूलन ने धीरे-धीरे खुद का एक गिरोह बना लिया. सन् 1980 के दशक में वह चंबल के बीहड़ों मे सबसे खतरनाक डाकू मानी जाती थी. सन् 1981 में वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में तब आई, जब उसने ऊंची जातियों के बाइस लोगों को एक साथ गोली मार दी. फूलन देवी की छवि राबिनहुड की थी. उन्हें गरीबों का पैरोकार माना जाता था.

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीहड़ों में सक्रिय फूलन देवी को पकड़ने के लिए इन दोनों जगहों की सरकार और प्रतिद्वंदी गिरोहों ने बहुत कोशिश की लेकिन वो सफल नहीं हो सके. इस बीच फूलन का नजदीकी साथी विक्रम मल्लाह मारा गया; जिसके बाद फूलन कमजोर पड़ने लगी. फूलन भी भागते भागते बीहड़ की जिंदगी से ऊबने लगी. हालांकि उनको डर था कि आत्मसमर्पण करने की स्थिति में पुलिस उनको और उनके साथियों को कहीं मार न दे और उनके परिवार के लोगों और समर्थकों को नुकसान ना पहुंचाए. कांग्रेस की सरकार में उन्होंने मध्य प्रदेश के तात्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की उपस्थिति में 12 फरवरी 1983 को इस समझौते के तहत अपने दर्जन भर समर्थकों के साथ आत्म समर्पण कर दिया कि उनको मृत्यु दंड नहीं दिया जाएगा. उनके आत्म समर्पण के समय उनके हजारों समर्थक मौजूद थे. जेल में रहते हुए ही फूलन देवी ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन हार गई. बिना मुकदमा चलाए फूलन देवी ने 11 साल तक जेल में बिताया. सन् 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने उन्हें जेल से रिहा कर दिया. उन पर ‘बैंडीट क्वीन’ नाम से एक फिल्म भी बनी, जिसने उन्हें काफी प्रसिद्धी सहानुभूति दिलाई.

अपनी रिहाई के बाद फूलन देवी ने धम्म का रास्ता अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया. उन्होंने एकलव्य सेना का भी गठऩ किया. उन्होंने राजनीति की राह ली और उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं. वह दो बार सांसद रही. सन् 2001 में केवल 38 साल की उम्र में दिल्ली में सरकारी आवास के बाहर ही 25 जुलाई 2001 को फूलन देवी की हत्या कर दी गई. फूलन देवी के हत्यारे ने इस हत्या को ठाकुरों की सामूहिक हत्या का बदला कहा.

फूलन देवी के जीवन संघर्ष को विदेशों में भी सलाम किया गया. ब्रिटेन में आउटलॉ नाम की एक किताब प्रकाशित हुई है जिसमें उनके जीवन के कई पहलुओं पर चर्चा की गई है. फूलन देवी को मिली जेल की सजा के बारे में पढ़ने के बाद लेखक रॉय मॉक्सहैम ने 1992 में उनसे पत्राचार शुरू किया. जब फूलन देवी ने उनके पत्र का जवाब दिया तो रॉय मॉक्सहैम भारत आए और उन्हें फूलन देवी को करीब से जानने का मौका मिला. बीबीसी के साथ बातचीत में लेखक रॉय ने फूलन देवी के साथ अपनी दोस्ती को याद करते हुए कहा था कि उन्होंने जिंदगी में बहुत कुछ सहा, लेकिन इसके बावजूद फूलन देवी बहुत हंसमुख थी. वे हमेशा हंसती रहती थी, मजाक करती रहती थीं. हालांकि उन्होंने अपना बचपन गरीबी में गुजारा. मुझे लगता है कि वे गलत न्यायिक प्रक्रिया का शिकार हुई. उन्हें नौ साल जेल में बिताने पड़े. लेखक रॉय मॉक्सहैम का यह भी कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद जब फूलन देवी सांसद बन गई तो उनमें अन्य नेताओं वाले कोई नाज नखरे नहीं थे. एक बार मैं उनके घर गया तो वे अपना फ्लैट खुद साफ कर रही थीं क्योंकि उन्होंने नौकर रखने से इनकार कर दिया था. वे कहते हैं कि इस बात में कोई शक नहीं कि फूलन देवी एक हीरो थीं.

सन् 2011 में प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर प्रकाशित अपने अंक में फूलन देवी को इतिहास की 16 सबसे विद्रोही महिलाओं की सूची में चौथे नंबर पर रखा. इस अंक में टाइम मैगजीन ने फूलन देवी के बारे में लिखा कि उन्हें भारतीय गरीबों के संघर्ष को आवाज देने वाले के रूप में याद किया जाएगा.

गौतमबुद्ध म्यूजिक प्रोडक्शन खदिया नगला भरखनी

शास्त्री राहुल सिंह बौद्ध कुशवाहा खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई उत्तर प्रदेश गौतमबुद्ध म्यूजिक प्रोडक्शन खदिया नगला भरखनी जिला हरदोई 9198979617

Lal Bihari baudh लाल बिहारी बौद्ध

अत्यंत दुःखद समाचार।
आज बहुजन समाज के महान योद्धा व अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष आदरणीय लाल बिहारी बौद्ध परिनिर्वाण को प्राप्त हो गये हैं ।प्रकृति उनकी चेतना को शांति दें।
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तथागत बुद्ध से प्रार्थना है कि परिनिब्बत आत्मा को शांति प्रदान करे,एवं उनके परिवार पर पड़े इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
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खदिया नगला भरखनी budhpurnima San 2021

🌹 आप सबको नमो. बौद्ध🌹
बुद्ध ने ज्ञान के सार को कुल 55 बिंदुओं में समेट दिया।
चार – आर्य सत्य
पाँच – पंचशील
आठ – अष्टांगिक मार्ग और
अड़तीस – महामंगलसुत

बुद्ध के चार आर्य सत्य

1. दुनियाँ में दु:ख है।
2. दु:ख का कारण है।
3. दु:ख का निवारण है। और
4. दु:ख के निवारण का उपाय है।
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पंचशील

1. झूठ न बोलना
2. अहिंसा
3. चोरी नहीं करना
4. व्यभिचार नहीं करना और
5. नशापान/मद्यपान नहीं करना
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अष्टांगिक मार्ग

1. सम्यक दृष्टि (दृष्टिकोण) /Right view
2. सम्यक संकल्प / Right intention
3. सम्यक वाणी / Right speech
4. सम्यक कर्मांत/ Right action
5. सम्यक आजीविका/ Right livelihood (profession)
6. सम्यक व्यायाम / Right exersie (physical activity)
7. सम्यक स्मृति / Right mindfulness
8. सम्यक समाधि / Right meditation (Vpasana Meditation)

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तथागत बुद्ध ने 38 प्रकार के मंगल कर्म बताये है जो महामंगलसुत के नाम से भी जाना जाता है, निम्न प्रकार है

2. बुद्धिमानों की संगति करना।
3. शीलवानो की संगति करना।
4. अनुकूल स्थानों में निवास करना।
5. कुशल कर्मों का संचय करना।
6. कुशल कर्मों में लग जाना।
7. अधिकतम ज्ञान का संचय करना।
8. तकनीकी विद्या अर्थात शिल्प सीखना।
9. व्यवहार कुशल एवं विनम्र होना।
10. विवेकवान होना।
11. सुंदर वक्ता होना।
12. माता पिता की सेवा करना।
13. पुत्र-पुत्री-स्त्री का पालन पोषण करना।
14. अकुशल कर्मों को ना करना।
15. बिना किसी अपेक्षाके दान देना।
16. धम्म का आचरण करना।
17. सगे सम्बंधियों का आदर सत्कार करना।
18. कल्याणकारी कार्य करना।
19. मन, शरीर तथा वचन से परपीड़क कार्य ना करना।
20. नशीली पदार्थों का सेवन ना करना।
21. धम्म के कार्यों में तत्पर रहना।
22. गौरवशाली व्यक्तित्व बनाए रखना।
23. विनम्रता बनाए रखना।
24. पूर्ण रूप से संतुष्ट होना अर्थात तृप्त होना।
25. कृतज्ञता कायम रखना।
26. समय समय पर धम्म चर्चा करना ।
27. क्षमाशील होना।
28. आज्ञाकारी होना।
29. भिक्षुओ, शीलवान लोगों का दर्शन करना।
30. मन को एकाग्र करना।
31. मन को निर्मल करना।
32. सतत जागरूकता बनाए रखना ।
33. पाँच शीलों का पालन करना।
34. चार आर्य सत्यों का दर्शन करना ।
35. आर्य अष्टांगिक मार्ग पर चलना।
36. निर्वाण का साक्षात्कार करना।
37. लोक धम्म लाभ हानि, यश अपयश, सुख-दुख,जय-पराजय से विचलित ना होना।
38. शोक रहित, निर्मल एवं निर्भय होना।

अगर कोई अपने दैनिक जीवन में इन 38 मंगल कर्मों का पालन करने लग जाये, तो उसके जीवन से सारे दुःख एवं परेशानियां हमेशा के लिए दूर हो जायेंगी।।।

अध्यात्म के क्षेत्र में गहरा उतरने वालों को त्रिपिटक का अध्ययन करना चाहिए

किंतु, गृहस्थ जीवन सफल और सम्मानित तरीके से जीने और निर्वाण प्राप्त करने के लिए यहाँ दी गई 55 बातें हीं काफी (सफिसियेंट) है।

तो आईये। बुद्ध के बताये मार्ग पर चलकर जीवन यापन करें और धार्मिक आडंबरों और पाखंड से दूर रहें।

बुद्धं शरणम गच्छामि!
धम्मं शरणम गच्छामि!
संघम् शरणम गच्छामि!

नमो बुद्धाय….जय सम्राट अशोक

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